Surah Abasa سُورَةُ عَبَسَ
Surah 80 of the Holy Quran — “He frowned” — in Arabic with Hindi translation by Suhel Farooq Khan and Saifur Rahman Nadwi. Read online or save as PDF.
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ
عَبَسَ وَتَوَلَّىٰٓ1
वह अपनी बात पर चीं ब जबीं हो गया
أَن جَآءَهُ ٱلْأَعْمَىٰ2
और मुँह फेर बैठा कि उसके पास नाबीना आ गया
وَمَا يُدْرِيكَ لَعَلَّهُۥ يَزَّكَّىٰٓ3
और तुमको क्या मालूम यायद वह (तालीम से) पाकीज़गी हासिल करता
أَوْ يَذَّكَّرُ فَتَنفَعَهُ ٱلذِّكْرَىٰٓ4
या वह नसीहत सुनता तो नसीहत उसके काम आती
أَمَّا مَنِ ٱسْتَغْنَىٰ5
तो जो कुछ परवाह नहीं करता
فَأَنتَ لَهُۥ تَصَدَّىٰ6
उसके तो तुम दरपै हो जाते हो हालॉकि अगर वह न सुधरे
وَمَا عَلَيْكَ أَلَّا يَزَّكَّىٰ7
तो तुम ज़िम्मेदार नहीं
وَأَمَّا مَن جَآءَكَ يَسْعَىٰ8
और जो तुम्हारे पास लपकता हुआ आता है
وَهُوَ يَخْشَىٰ9
और (ख़ुदा से) डरता है
فَأَنتَ عَنْهُ تَلَهَّىٰ10
तो तुम उससे बेरूख़ी करते हो
كَلَّآ إِنَّهَا تَذْكِرَةٌۭ11
देखो ये (क़ुरान) तो सरासर नसीहत है
فَمَن شَآءَ ذَكَرَهُۥ12
तो जो चाहे इसे याद रखे
فِى صُحُفٍۢ مُّكَرَّمَةٍۢ13
(लौहे महफूज़ के) बहुत मोअज़ज़िज औराक़ में (लिखा हुआ) है
مَّرْفُوعَةٍۢ مُّطَهَّرَةٍۭ14
बुलन्द मरतबा और पाक हैं
بِأَيْدِى سَفَرَةٍۢ15
(ऐसे) लिखने वालों के हाथों में है
كِرَامٍۭ بَرَرَةٍۢ16
जो बुज़ुर्ग नेकोकार हैं
قُتِلَ ٱلْإِنسَٰنُ مَآ أَكْفَرَهُۥ17
इन्सान हलाक हो जाए वह क्या कैसा नाशुक्रा है
مِنْ أَىِّ شَىْءٍ خَلَقَهُۥ18
(ख़ुदा ने) उसे किस चीज़ से पैदा किया
مِن نُّطْفَةٍ خَلَقَهُۥ فَقَدَّرَهُۥ19
नुत्फे से उसे पैदा किया फिर उसका अन्दाज़ा मुक़र्रर किया
ثُمَّ ٱلسَّبِيلَ يَسَّرَهُۥ20
फिर उसका रास्ता आसान कर दिया
ثُمَّ أَمَاتَهُۥ فَأَقْبَرَهُۥ21
फिर उसे मौत दी फिर उसे कब्र में दफ़न कराया
ثُمَّ إِذَا شَآءَ أَنشَرَهُۥ22
फिर जब चाहेगा उठा खड़ा करेगा
كَلَّا لَمَّا يَقْضِ مَآ أَمَرَهُۥ23
सच तो यह है कि ख़ुदा ने जो हुक्म उसे दिया उसने उसको पूरा न किया
فَلْيَنظُرِ ٱلْإِنسَٰنُ إِلَىٰ طَعَامِهِۦٓ24
तो इन्सान को अपने घाटे ही तरफ ग़ौर करना चाहिए
أَنَّا صَبَبْنَا ٱلْمَآءَ صَبًّۭا25
कि हम ही ने (बादल) से पानी बरसाया
ثُمَّ شَقَقْنَا ٱلْأَرْضَ شَقًّۭا26
फिर हम ही ने ज़मीन (दरख्त उगाकर) चीरी फाड़ी
فَأَنۢبَتْنَا فِيهَا حَبًّۭا27
फिर हमने उसमें अनाज उगाया
وَعِنَبًۭا وَقَضْبًۭا28
और अंगूर और तरकारियाँ
وَزَيْتُونًۭا وَنَخْلًۭا29
और ज़ैतून और खजूरें
وَحَدَآئِقَ غُلْبًۭا30
और घने घने बाग़ और मेवे
وَفَٰكِهَةًۭ وَأَبًّۭا31
और चारा (ये सब कुछ) तुम्हारे और तुम्हारे
مَّتَٰعًۭا لَّكُمْ وَلِأَنْعَٰمِكُمْ32
चारपायों के फायदे के लिए (बनाया)
فَإِذَا جَآءَتِ ٱلصَّآخَّةُ33
तो जब कानों के परदे फाड़ने वाली (क़यामत) आ मौजूद होगी
يَوْمَ يَفِرُّ ٱلْمَرْءُ مِنْ أَخِيهِ34
उस दिन आदमी अपने भाई
وَأُمِّهِۦ وَأَبِيهِ35
और अपनी माँ और अपने बाप
وَصَٰحِبَتِهِۦ وَبَنِيهِ36
और अपने लड़के बालों से भागेगा
لِكُلِّ ٱمْرِئٍۢ مِّنْهُمْ يَوْمَئِذٍۢ شَأْنٌۭ يُغْنِيهِ37
उस दिन हर शख़्श (अपनी नजात की) ऐसी फ़िक्र में होगा जो उसके (मशग़ूल होने के) लिए काफ़ी हों
وُجُوهٌۭ يَوْمَئِذٍۢ مُّسْفِرَةٌۭ38
बहुत से चेहरे तो उस दिन चमकते होंगे
ضَاحِكَةٌۭ مُّسْتَبْشِرَةٌۭ39
ख़न्दाँ शांदाँ (यही नेको कार हैं)
وَوُجُوهٌۭ يَوْمَئِذٍ عَلَيْهَا غَبَرَةٌۭ40
और बहुत से चेहरे ऐसे होंगे जिन पर गर्द पड़ी होगी
تَرْهَقُهَا قَتَرَةٌ41
उस पर सियाही छाई हुई होगी
أُو۟لَٰٓئِكَ هُمُ ٱلْكَفَرَةُ ٱلْفَجَرَةُ42
यही कुफ्फ़ार बदकार हैं
Arabic text: Tanzil Project (tanzil.net), used under its licence with credit. Hindi translation: Suhel Farooq Khan and Saifur Rahman Nadwi. Shared free for reading and learning. The translation gives the meaning of the Quran; it is not a replacement for the Arabic.